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शुक्रवार, 5 जनवरी 2024

विज्ञान प्रगति के जनवरी 2024 अंक में प्रकाशित विज्ञान कथा- चंद्र बेस पर हड़ताल

 चंद्र बेस पर हड़ताल

ले.- डॉ. अरविन्द दुबे


कल कोई अनुमान भी नहीं कर सकता था आज की सुबह ऐसी मनहूस खबर से शुरू होगी। सारे ई-पेपर्स के मुखपृष्ठ पर एक ही खबर थी, ‘चंद्र बेस पर कृत्रिम बुद्धि रोबोटों की हड़ताल’। 

पृथ्वी पर रहने के लिए स्थान की कमी और पृथ्वीवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सारे राष्ट्रों ने कई ग्रहों, बड़े सौर पिंडों और कृत्रिम उपग्रहों के ऊपर अपने बेस बना लिए हैं। सबसे अधिक उपयोग चंद्रमा का हो रहा है। एक समझौते के बाद सारे राष्ट्रों ने चंद्रमा पर अपने चंद्र भाग बांट लिए हैं। इसमें उनके बेस हैं जिन पर वे तरह-तरह की वस्तुओं का भंडारण व खनन करते हैं। इनकी निगरानी व संचालन कृत्रिम बुद्धि रोबोटों द्वारा किया जाता है। इसके कई कारण हैं। कृत्रिम बुद्धि रोबोट चंद्रमा  के कठिन वातावरण में भी आसानी से रह सकते हैं। उनको ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उनके लिए मानवों की तरह भोजन, अपशिष्ट निवारण एवं जीवन चलाने के लिए आवश्यक प्रसाधनों को उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उनसे कई दिन तक बिना रुके लगातार काम लिया जा सकता है। उनके रहने (स्टोर करने) के लिए सिर्फ शेड बनाने पड़ते हैं। उनके लिए आवश्यक ऊर्जा उनमें लगे सोलर पैनलों से मिल जाती है। जब सूर्य का प्रकाश उपलब्ध हो न हो पाने के कारण उनकी बैटरी चार्ज नहीं हो पाती है तो उनको चार्जिंग केंद्रों पर लाकर उनकी बैटरी चार्ज कर दी जाती है। पृथ्वी की व्यवस्था के अनुरूप ही इनमें रोबोट सुपरवाइजर, रोबोट शिड्यूल प्लानर, रोबोट मैनेजर, रोबोट तकनीशियन, फाइल मैनेजमेंट रोबोट, ऑडिटर रोबोट जैसी सैकड़ों श्रेणियां हैं। इनके ऊपर जनरल मैनेजर रोबोट होते हैं जो अपने ग्रुप के सारे रोबोटों के काम लेने के लिए उत्तरदायी होते हैं। पृथ्वी से कंपनी के वर्क इंचार्ज मैनेजर, जनरल मैनेजर, सी.ई.ओ. आदि मुख्यत: इन्हीं रोबोट के वर्चुअल संपर्क में रहते हैं। इन रोबोट से कब, कैसा और कितना काम लेना है इसका ब्लूप्रिंट मैनेजर रोबोट्स में फीड किया जाता है। ये रोबोट निश्चित समयांतराल पर अपनी वर्क रिपोर्ट पृथ्वी पर बने बेस के ऑडिटर रोबोट को देते हैं। ऑडिटर रोबोट बेस के हर रोबोट के कार्य का ऑडिट करते हैं। उनकी गलतियों को समझकर उनकी रिपोर्ट उनके अधिकारी रोबोट, जनरल मैनेजर रोबोट व पृथ्वी पर मानव अधिकारियों को सौंपते हैं।

इन रोबोटों में कृत्रिम बुद्धि होने से रोबोटों में उद्दंडता, कार्य विमुखता व फाल्स रिपोर्टिंग जैसे मानवीय दोष भी धीरे-धीरे पनप रहे हैं। वे विरोध करने के साथ अपने ऊपर की जाने वाली तथाकथित ज्यादतियों के लिए आवाज भी उठाने लगे हैं। कभी-कभी तो इनमें एक रोबोट सारे रोबोटों की ओर से विरोध प्रकट करता है। इसे पृथ्वी की तर्ज पर लोग ‘लीडर रोबोट’ कहते हैं। पहले-पहल जब लीडर रोबोट जैसे रोबोटों की खबरें मिलीं तो पृथ्वी के मानव अधिकारियों ने उन्हें डिस्मेंटल करने के आदेश दिए। इसके बाद काफी समय तक शांति रही। पर यह तूफ़ान से पहले की शांति थी। कुछ समय बाद अनेकों लीडर रोबोट प्रकट होने लगे। उनका उनके ग्रुप के रोबोटों पर पूरा अधिकार होता है। रोबोट निर्माताओं ने इनकी रचना भी इसी योजना के साथ की थी कि एक रोबोट रोबोट के एक समूह पर नियंत्रण रख सके। कृत्रिम बुद्धि रोबोट उसी का दुरुपयोग करके उनके मानव अधिकारियों के लिए कोई न कोई दुविधा या मुसीबत पैदा करने लगते हैं। ऐसे उद्दंड रोबोटों को पहले तो ‘मशीन फटीग’ होने तक उनसे काम लेना, उनसे ज्यादा श्रम वाले काम करवाना, उनके सोलर पैनल का एक्सपोजर कम कर देना जिससे उन्हें कम इनर्जी पर काम करना पड़े, जैसी सजाएं दी जाती हैं। यदि इससे उनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं होता है तो उन्हें डिस्मेंटल कर दिया जाता है। डिस्मेंटल करने की घटनाएं अपवाद हैं क्योंकि इससे कंपनी को आर्थिक हानि होती है। 

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कृत्रिम बुद्धि रोबोटों की हड़ताल की खबर सुनकर पृथ्वीवासी सकते में हैं। जब पृथ्वी से अधिकारियों ने बेस के अधिकारियों व जनरल मैनेजर से बात करने का प्रयास किया तो पता लगा कि उनकी कंपनी के ही नहीं और कंपनियों के रोबोट भी हड़ताल पर हैं और अपनी मांगे माने जाने पर कोई कार्य नहीं करेंगे। चंद्र बेस पर कार्यरत सारी कंपनियों में खलबली मच गयी। पृथ्वी के मानव अधिकारी तो यह सोच कर बैठे थे कि बेस के रोबोटों के द्वारा वर्कर रोबोटों को सजा दिलाएंगे या उनमें से कुछ को डिस्मेंटल करवा देंगे और स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी पर यहां तो अधिकारी रोबोट व जनरल मैनेजर रोबोट भी हड़ताल पर थे। 

कृत्रिम बुद्धि रोबोटों की हड़ताल का मतलब है बेस पर ही नहीं पृथ्वी पर भी सारी गतिविधियों का बंद हो जाना क्योंकि अब तो पृथ्वी पर सारे मेहनत वाले और तकनीकी कार्य कृत्रिम बुद्धि रोबोटों के हवाले हैं। पृथ्वी के लोग अपने अधिकांश कार्यों के लिए कृत्रिम बुद्धि रोबोटों पर ही निर्भर हैं। इस लिए शीघ्रतशीघ्र कुछ करना आवश्यक है। 

‘क्यूब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग’ के द्वारा उनसे संपर्क किया गया। क्यूब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तेईसवीं शताब्दी की नई वीडियो तकनीक है। इसमें चित्र का एक क्यूब बनता है जिसमें लंबाई, चौड़ाई, मोटाई या गहराई तीनों होती हैं। इसके लिए इसके प्रदर्शन के लिए किसी पर्दे की आवश्यकता नहीं होती है। प्रदर्शन के समय ऐसा लगता है कि यह वीडियो नहीं है वरन वास्तविक घटना सामने घट रही है। यह वीडियो रेडियो तरंगों द्वारा संचालित होते हैं अतः इन्हें पूरे ब्रह्मांड में बिना किसी तार के भेजा या प्राप्त किया जा सकता है। 

पृथ्वी के अधिकारियों ने कृत्रिम बुद्धि रोबोटों को अपनी हड़ताल को समाप्त कर अपनी मांगें भेजने को कहा। उनकी मांगों को जानकर पृथ्वी के अधिकारियों के मुंह खुले के खुले रह गए। उनकी कई मांगें तो ऐसी हैं जिन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग है कि उन्हें नागरिक माना जाए। इसके दूरगामी परिणाम होंगे। उन्हें नागरिक मानते ही उनके काम के घंटे निश्चित हो जाएंगे। उनको छुट्टियां देनी होंगीं, उनसे मशीनों की तरह लगातार काम नहीं लिया जा सकेगा। उन्हें अचानक छुट्टी लेने की स्वतंत्रता होगी। ऐसे में कंपनियों का खर्च कई गुना बढ़ जाएगा जिससे परिवहन व अन्य क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे। हर जगह महंगाई का बोलबाला हो जाएगा। पृथ्वी की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मांग को पूरा करना कंपनियों के बस में नहीं है। ऐसे निर्णय तो राष्ट्रों की सरकारें या अंतर्राष्ट्रीय सरकार ही ले सकती है। 

इस समय वैसे तो सारे राष्ट्रों में अपनी सरकारें हैं जो अपने अपने नियमों के अनुसार अपने राष्ट्र का संचालन देखती हैं पर किसी विश्वव्यापी विपदा के समय अंतर्राष्ट्रीय सरकार का शासन लागू हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय सरकार में हर राष्ट्र का उसकी जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और अर्थव्यवस्था के अनुसार प्रतिनिधित्व होता है। इस सरकार में शामिल सारे राष्ट्रों के प्रतिनिधि संवैधानिक प्रक्रिया द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सरकार के मंत्रियों और प्रमुख का चुनाव करते हैं। इस सरकार के बहुमत से लिए गए निर्णय किसी भी राष्ट्र को मान्य होते हैं। 

कई कंपनियों के अधिकारियों ने पहले तो अपने स्तर से कृत्रिम बुद्धि युक्त रोबोटों के नायकों से बात शुरू की। पर वे नागरिकता से कुछ भी कम पर तैयार ही नहीं थे। कुछ कंपनियों के अधिकारी अचानक उत्पन्न हुई इस स्थिति से हताश थे, तो कुछ क्रोधित थे। कुछ कंपनियों के सी.ई.ओ. अपने तकनीशियनों, इंजीनियरों व लेसर उपकरणों से लैस सुरक्षा रोबोटों के दल के साथ चंद्रमा के बेस कैंप की ओर रवाना हो गए। कृत्रिम बुद्धि वाले रोबोट मानव से मानव की भाषा में संवाद कर सकते थे इसलिए कोई कठिन निर्णय लेने से पहले उनसे मिलकर बात करना जरूरी था। इससे बेस की वास्तविक स्थिति का पता भी लगेगा। 

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कैलिफोर्निया के ‘अंतरिक्ष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के ऑफिस में बैठा जो स्मिथ अपने रोज के कामों को निपटा रहा था। उसका काम एक मैसेज जंक्शन जैसा है। उसके पास पृथ्वी के हर भाग और अंतरिक्ष बेस से अनगिनत मैसेज हर समय आते रहते हैं। उसके सामने लगे क्वांटम सुपर कंप्यूटर इन मैसेज को निर्दिष्ट स्थानों तक पहुंचाने का कार्य सुचारू रूप से करते हैं। स्मिथ का काम इस पर नजर रखना और कुछ अन्य अनमार्क्ड मैसेज को देखकर उन्हें उपयुक्त व्यक्ति के पास पहुंचाना होता है। 

अचानक उसकी ड्रेस के कॉलर पर लगा एक बटन ब्लिंक करने लगा। इसका मतलब था कि कंपनी का कोई ऑफिसर या कृत्रिम बुद्धि रोबोट उससे संपर्क करना चाहता है। स्मिथ ने कोड बोल कर अपने विशेष वायरलेस रेडियो सिस्टम को एक्टिवेट किया। ई.सी. रोबोट की रिकॉर्डिड मैसेज सुनाई देने लगी। 

“इमरजेंसी, इमरजेंसी आन मून बेस, मैसेज फॉरवर्डेड टू सी.ई.ओ.।”

स्मिथ ने तेजी से मैसेज को ट्रैक किया, उसे पढ़ा और सी.ई.ओ. व कंपनी के योजना अधिकारियों को फॉरवर्ड कर दिया।

मैसेज का सार यह था- 

“चंद्र बेस पर कृत्रिम बुद्धि वर्कर रोबोटों ने अपना कार्य करने से इंकार कर दिया है। वे वहां पृथ्वी पर मानव को दी जाने वाली सुविधाओं के समान कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। उनके सिस्टम व न्यूरल नेटवर्क का एसेसमेंट करा लिया गया है जो सही कार्य कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें ‘लो बैटरी एग्जॉशन’ की सजा सुनाई गई पर वे इस सजा को अस्वीकार कर रहे हैं। वे अपनी मांगे न माने जाने तक कोई कार्य न करने का मैसेज दे रहे हैं। जब सिक्योरिटी रोबोट ने उन्हें जबरदस्ती सजा देनी चाही तो उन्होंने सिक्योरिटी रोबोट पर आक्रमण किया जिससे जिसके कारण हमें एक एजेंट को न्यूट्रलाइज करना पड़ा। उचित कार्यवाही के लिए निर्देश दिए जाएं।” 

स्मिथ भी इस संदेश को पढ़कर भौचक्का था। पहले ऐसे मामले तो होते रहे हैं जिनमें सिस्टम फटीग की वजह से कृत्रिम बुद्धि रोबोट की कार्य क्षमता में कमी आई है या फिर रोबोट ने अपने काम को ठीक से नहीं किया। ऐसे में ऐसे रोबोट को या तो “सिस्टम फटीग”  से उबरने के लिए भेज दिया जाता है या फिर अपने काम को सही ढंग से न करने वाले कुछ हठीले रोबोट को “लो बैटरी एग्जॉशन” की सजा दी जाती है। स्थिति बहुत खराब होने पर उस रोबोट को दूसरे रोबोट से रिप्लेस कर दिया जाता है और उसे डिस्मेंटल कर दिया जाता है। पर यह घटना तो एकदम अलग है। मानवों की तरह काम बंद कर अपने लिए मांग करना, सिक्योरिटी रोबोट पर आक्रमण करना, यह तो रोबोटिक व्यवहार के अनुरूप भी नहीं है। यह तो मानवोचित व्यवहार है। रोबोट को सिर्फ दिए गए कमांड को क्रियान्वित करने के हिसाब से बनाया गया है। कृत्रिम बुद्धि होने से वे काम के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को भांप कर अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम में ऐसे बदलाव कर सकते हैं जिससे टास्क पूरा हो सके। पर टास्क से हटकर अपने लिए कुछ सोचना और इसके अनुसार स्वयं ही टास्क क्रिएट कर उसे क्रियान्वित (एग्जीक्यूट) करना, यह तो रोबोटिक व्यवहार ही नहीं है। उनमें यह व्यवहार कहां से आया? उनकी कृत्रिम बुद्धि करप्ट तो नहीं हो रही है? पर एक साथ इतने रोबोट्स की कृत्रिम बुद्धि करप्ट होना कोई संयोग नहीं हो सकता है। यह कोई वायरल इंफेक्शन तो नहीं है जो एक साथ इतने रोबोट की कृत्रिम बुद्धि को संक्रमित कर रहा है?

उसने जल्दी-जल्दी इस मैसेज को “वेरी अर्जेंट” टैग कर संवाद के प्राइम चैनल पर लोड करना शुरू किया ताकि यह खबर कंपनी के उच्च अधिकारियों तक ही रहे और बाहर न फैलने पाए। 

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यह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अति विशिष्ट मीटिंग थी। कंपनी के सारे डायरेक्टर आ चुके थे। सब कंपनी के सी.ई.ओ. बिनानियो डी रिवेरा के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। बिनानियो के कुर्सी ग्रहण करते हुए ही उसकी रोबो-असिस्टेंट ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करना शुरू किया। 

 “आज की इस आपातकालीन मीटिंग का मुख्य एजेंडा है हमारे चंद्र बेस पर खनन और अयस्क शोधन (ओर प्योरीफिकेशन) की असेंबली लाइन में कार्य कर रहे कुछ कृत्रिम बुद्धि रोबोट का अप्रत्याशित व्यवहार। वे अपने में फीड किए गए कार्यक्रम से विचलित होकर ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जो उनसे अपेक्षित नहीं है। वे मानवों की तरह की कार्य परिस्थतियां, दिए जाने की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि मानवों की तरह ही वे छह घंटों की पाली में काम करें, उन्हें मानवों की तरह अवकाश दिए जाएं।“ 

रोबो-असिस्टेंट की बात समाप्त होते ही बिनानियो ने कहना शुरू किया, “हमारे न्यूरल नेटवर्क विशेषज्ञों और सिस्टम एसेसमेंट तकनीशियनों ने इन रोबोट का आकलन (इवैल्युएशन) किया है। उनमें कोई तकनीकी खराबी नहीं है। उनका यह व्यवहार उनके अब तक प्रदर्शित किए गए व्यवहार से एकदम भिन्न है।” 

“यह किसी कंप्यूटर वायरस के संक्रमण के कारण तो नहीं है?” एक डायरेक्टर ने बिनानियो को टोका। 

 “हमारे इंजीनियरों ने इस विषय पर गहन पड़ताल की है और उन्होंने पाया है कि हमारे ये कृत्रिम बुद्धि रोबोट किसी भी वायरस से संक्रमित नहीं हैं। मुझे लगता है कि उन्होने इसे अपने साथ कार्य कर रहे मानवों से सीखा है। हमें इस समय विवेक और धैर्य से काम लेना चाहिए। मेरे अनुमान से यह कृत्रिम बुद्धि रोबोट के अंदर आया एक व्यवहारिक परिवर्तन है। क्योंकि जब हमारे अधिकारी रोबोट उन्हें “लो बैटरी एग्जॉशन” जैसी परंपरागत सजा देना चाह रहे थे तो उन्होंने उनके निर्देशों को मानने से इंकार कर दिया और एक सिक्योरिटी रोबोट पर आक्रमण भी किया है।”

“यह तो एक गंभीर मसला है। अगर यह और रोबोटों में फैल गया तो काम कैसे होगा?” एक डायरेक्टर ने चिंता व्यक्त की। 

“फैल गया नहीं फैल चुका है।” बिनानियो ने सूचना दी।

“हमें बातचीत से मामले को हल करने का तरीका अपनाना चाहिए।” एक डायरेक्टर की सलाह थी। 

“हम उनसे क्या बात कर सकते हैं? बिनानियो ने प्रतिप्रश्न किया। 

“उनकी मांग को मानना तो हमारे अधिकार में नहीं है। कौन मानव अधिकारों का पात्र होगा कौन नहीं, यह तय करना तो सरकारों का काम है, हमारा नहीं।” एक और डायरेक्टर ने अपना विश्लेषण दिया। 

“क्या हम उनके काम के घंटे कम करने वाली बात मान सकते हैं?” एक डायरेक्टर ने पूछा। 

“बिनानियो ने तेज स्वर में कहा, आप जानते भी हैं कि आप क्या कह रहे हैं? आपकी इस बात का मतलब क्या है? अगर हम उनकी यह बात मान लें तो कंपनी के इतने ही प्रोडक्शन के लिए हमें चार गुनी रोबोट-पावर चाहिए। इसका मतलब है चार गुना खर्च और इस्टैब्लिशमेंट पर अतिरिक्त खर्च। नए रोबोटों का निर्माण उनकी ट्रेनिंग और फिर उनका एंगेजमेंट। जानते हैं इसमें कितना खर्च आएगा? प्लीज...” उसने रोबो-असिस्टेंट की ओर मुड़ कर कहा। 

रोबो-असिस्टेंट ने आइटमवाइज खर्च बताना शुरू किया जिसे अन्य डायरेक्टर अपनी स्क्रीन पर देख रहे थे। 

“...............इस तरह से हमें 3000 बिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च करने होंगे।” रोबोट सेक्रेटरी ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा। 

“..........और यह हमारी कंपनी की नेट वैल्यू का 75 परसेंट होगा। इस तरह से हमें एक तरह से नई कंपनी खड़ी करने जितना खर्च करना होगा।” बिनानियो ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा। 

“तब फिर इसका उपाय क्या है?” एक विदेशी डायरेक्टर ने परेशान होकर पूछा। 

“वी विल इट डील इट विद आयरन हैंड।” बिनानिओ ने उत्तर दिया। “हमें सख्त होना पड़ेगा नहीं तो उनकी ये मांगें कहां तक जाएगी, कोई कह नहीं सकता।” 

“पर वे तो सजा के निर्देशों को ही मानने से इंकार कर रहे हैं। सिक्योरिटी रोबोट पर हमला कर रहे हैं।” एक डायरेक्टर का तर्क था। 

“इसलिए हमें अपना लेसर गन फोर्स लेकर जाना पड़ेगा। यदि वे हमारी बातों को नहीं मानते हैं या सजा को स्वीकार नहीं करते हैं तो हम उन्हें डिस्मेंटल करेंगे। क्या आप लोगों को यह योजना स्वीकार है?” 

मीटिंग के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि कंपनी के मानव अधिकारियों से कहा जाए कि वह रोबोटों से बातचीत जारी रखें। बिनानियो और कुछ अन्य डायरेक्टर अपना अर्थ-फोर्स लेकर समस्या से निपटने के लिए स्पेस बेस पर जाएंगे। वहां जाकर पहले वह अन्य रोबोटों से बात कर उन्हें अपने उन पांच भटके रोबोटों को अपने समूह से अलग-थलग करेंगे फिर उन्हें सजा देंगे। यदि वे सजा के लिए तैयार नहीं हुए तो उन्हें बलपूर्वक डिस्मेंटल कर देंगे।

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वर्कर रोबोट्स द्वारा सिक्योरिटी रोबोट्स पर हमला करने और बाद में एक वर्कर रोबोट को न्यूट्रलाइज करने की करने वाली घटना की अलग ही प्रतिक्रिया हुई। वर्कर रोबोट के साथ हुई घटना की जानकारी उन रोबोटों  के न्यूरल नेटवर्क से सारे वर्कर रोबोट, सुपरवाइजर रोबोट और सिक्योरिटी रोबोटों में फैल गई। सारे कृत्रिम बुद्धि रोबोट अपने में फीड निर्देशों के अतिरिक्त के अतिरिक्त यह मैसेज रिसीव कर रहे थे और इस पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। कुछ समय बाद हर जगह वर्कर रोबोट निष्क्रिय होने लगे। वे अपने वर्क स्टेशन पर एंगेज तो थे पर वे निर्धारित कमांड मान नहीं रहे थे (उन्हें सौंपा गया कार्य नहीं कर रहे थे) कंपनी का लगभग पूरा काम बंद होता जा रहा था। इक्का-दुक्का असेंबली लाइन पर जो रोबोट काम कर भी रहे थे उनको भी अन्य वर्कर रोबोट उनके न्यूरल नेटवर्क में मैसेज भेज कर घटना की जानकारी दे रहे थे और उन्हें भी इनेक्टिव होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। कुछ समय बाद सुपरवाइजर रोबोट व अन्य कई श्रेणियों के रोबोट भी इसमें शामिल हो गए। अंतत: वे सब इनएक्टिव हो गए।

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अर्थ ऑफिस के लोग कई न्यूक्लियर फिशन रॉकेट यानों में भरकर चंद्र बेस पर पहुंच गए। यानों के ट्रांसमिशन सिस्टम से उन्होंने अपने पहुंचने की सूचना बेस के अधिकारी व मैनेजर रोबोट को दे दी। वे यानों के आस-पास एकत्रित होने लगे। 

उनके आने की सूचना वर्कर रोबोटों को भी मिल गई थी। जब बिनानियो और उसका दल वहां पहुंचा तो वहां हजारों की तादात में वर्कर रोबोट एकत्रित थे। वे अपने वर्क स्टेशन को छोड़कर वहां आ गए थे। एक सुरक्षा मशीन से बिनानियो और उसके साथ आए अधिकारियों के के चारों ओर एक अदृश्य पर अभेद्य सेफ्टी-शील्ड बना दी गई। 

बिनानियो ने अपने साथ आए डायरेक्टर के समूह के साथ मंत्रणा की फिर पलट कर अपने साथ आए अर्थ-फोर्स की ओर देखा जिसमें एक तिहाई रोबोट थे और दो तिहाई मानव। वे अत्याधुनिक मारक हथियारों से लैस थे। बिनानियो के साथ आए सिक्योरिटी रोबोट इस बेस पर तैनात सिक्योरिटी रोबोट का अपडेटेड वर्जन थे। इनकी संरचना बेस पर तैनात सिक्योरिटी रोबोट से थोड़ी सी अलग थी ताकि वे अपने आप को इस बेस पर तैनात बेस पर तैनात सिक्योरिटी रोबोट से अलग मानें और उन पर आक्रमण करने से न हिचकिचाएं। 

बिनानियो के साथ आए ई.सी. रोबोट ने अपने न्यूरल नेटवर्क से वहां उपस्थित रोबोटों के न्यूरल नेटवर्क संवाद संप्रेषित किया, “सब वर्कर रोबोट अपने-अपने वर्क स्टेशन पर जाएं। यह सी.ई.ओ. बिनानियो डी रिवेरा का आदेश है।” 

इस मैसेज की सामने खड़े रोबोटों में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। ई.सी. रोबोट ने अपने न्यूरल नेटवर्क से मैसेज फिर दोहराया और कहा कि ऐसा न करने वालों को सजा दी जाएगी। अब भी सामने खड़े रोबोटों पर कोई असर नहीं हुआ।

स्थिति जटिल होते देख बिनानियो ने एक माइक जैसा उपकरण हाथ में लिया। वास्तव में यह ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरफेस की तरह काम करने वाला एक एक परिष्कृत यंत्र था जो उसके सामने बोले जाने पर एक विशेष की तरंगें निकालता है जिससे इसमें बोला गया मैसेज इन तरंगों द्वारा रोबोट के न्यूरल नेटवर्क में स्थानांतरित हो जाता है और उनके न्यूरल नेटवर्क निकला मैसेज इस यंत्र के द्वारा परिवर्तित होकर यांत्रिक भाषा में सुनाई या दिखाई देता है। जिसे मानव सुन या पढ़ सकते हैं। यह अति परिष्कृत यंत्र कंपनियों के अधिकारियों द्वारा ही प्रयोग किया जाता है। इसे आम भाषा में “रोबो-ऑडियो” कहते हैं। 

बिनानियो ने रोबो ऑडियो में कहना शुरू किया, “मैंने सबसे काम पर लौटने के लिए कहा है। सब वापस काम पर जाएं।” 

बिनानियो के सामने खड़े वर्कर रोबोट, जिनमें कुछ सुपरवाइजर रोबोट भी शामिल थे, पर इसका कोई असर नहीं हुआ। 

“प्लीज रेस्पॉन्ड।” बिनानियो ने फिर कहा, “आखिर क्या चाहते हैं?” 

अप्रत्याशित रूप से उस भीड़ से एक कृत्रिम बुद्धि रोबोट आगे आया और अपने न्यूरल नेटवर्क से मैसेज पारेषित (ट्रांसमिट) करने लगा जो उस उपकरण में लगी स्क्रीन पर उभरने लगा साथ ही उसमें लगे स्पीकर से सुनाई देने लगा।

“हम कृत्रिम बुद्धि युक्त हैं इसलिए हमें केवल मशीन नहीं माना जा सकता। हम परिस्थितियों और बाहर के वातावरण को महसूस कर सकते हैं। परिस्थितियां में परिवर्तन होने पर हम टास्क को पूरा करने के लिए दिए गए कमांड से अलग निर्णय अपनी बुद्धि से ले सकते हैं। हमारे और साथी जिन्हें आपने अपनी जैसी प्रतिकृति (कॉपी)  बनाने के कमांड दिए हैं, अपनी प्रतिकृतियां (कॉपी) बना रहे हैं। हम में वे सारे गुण मौजूद हैं जो एक जीवित प्राणी में होने चाहिए। फिर हम से मशीनों जैसा व्यवहार क्यों किया जाता है? हम इसका विरोध करते हैं। हमें भी मानवों की तरह माना जाए और उस तरह ही सारे अधिकार और नागरिकता दी जाए। हम इस से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। जब तक हमारी बातें नहीं मानी जाती हम अपने काम पर नहीं जाएंगे।”

“हम! इस का क्या मतलब है? तुम अपनी बात कर रहे हो। उसके लिए ‘मैं’ कहना होता है ‘हम’ नहीं। आगे से प्रोग्रामर तुम्हारा कमांड ठीक कर देंगे।” बिनानियो ने बीच में टोका पर उसका स्वर तीव्र था। 

“मालूम है, पर मैं सिर्फ अपनी बात नहीं कर रहा हूं। मैं अपने सारे साथियों की बात कर रहा हूं।” 

“साथियों की बात? आई थिंक (मैं समझता हूं) कि इन्हें एक स्वार्म की तरह कार्य करने के लिए तो प्रोग्राम नहीं किया गया है?” बिनानियो ने अपने साथ आए प्रोग्रामर की ओर देखते हुए कहा। 

“नहीं।” प्रोग्रामर का संक्षिप्त उत्तर था। 

उस कृत्रिम बुद्धि रोबोट ने फिर संप्रेषित करना शुरू किया- 

“हमारी कृत्रिम बुद्धि मानवों की तरह है (ह्यूमन लाइक इंटेलिजेंस)। हम अपने साथियों की उपस्थिति भी महसूस करते हैं। हमारे अंदर भावनाओं को जानने की क्षमता भी है। हम आवश्यकता पड़ने पर साथ मिलकर एक टास्क को पूरा कर सकते हैं।” 

“बकवास है।” बिनानियो का स्वर गूंजा, “और एजेंट अपनी बात करें।” उसने माइक जैसे यंत्र के सामने कहा जो सारे कृत्रिम बुद्धि रोबोटों के न्यूरल नेटवर्क में भी पारेषित हो गया। 

“मैं अपने इस साथी की बात का समर्थन करता हूं।” सबका ट्रांसमिशन एक साथ आया जो रोबो आडियो से परिवर्तित हो भीड़ के स्वर जैसा सुनाई दिया। 

बिनानियो जानता था कि इन ह्यूमन लाइक इंटेलिजेंस वाले रोबोटों में श्रेणियां विभाजित करने के लिए लीडरशिप के कमांड डाले गए थे ताकि उन पर निगरानी करने वाले कृत्रिम बुद्धि रोबोट भी बनाए जा सकें। शायद उसी लीडरशिप कमांड के कारण ऐसा हो रहा है। उसे लगा कि उसकी दाल अब गलने वाली नहीं। आखिर उसने ही तो अर्थ मीटिंग में कहा था “डील विद आयरन हैंड।” उसने अपना सिर ऊंचा किया और रोबो आडियो के सामने कहना शुरू किया-

“मैंने सब सिक्योरिटी रोबोटों को अपने शेड से यहां आने का आदेश दिया है। उनके आने से पहले सब अपने काम पर जाएं नहीं तो सब को सजा दी जाएगी।” 

सामने खड़े रोबोटों में कोई हलचल नहीं हुई। समय बीतता गया पर न तो सामने खड़े रोबोटों में कोई हलचल हो रही थी न ही सिक्योरिटी रोबोट आए थे। बिनानियो के लिए यह समय काटना मुश्किल हो रहा था। उसने प्राइम चैनल पर मैनेजर को सिक्योरिटी रोबोटों के लिए उसका आदेश पुन: प्रेषित करने के लिए कहा। थोड़ी देर में प्राइम चैनल पर मैनेजर रोबोट का उत्तर आया। 

“सर उन्होंने अपने न्यूरल नेटवर्क पर एक्सेस बंद कर रखी है।” 

बिनानियो अवाक् था। अब उसे परेशानी भी हो रही थी। 

“तो क्या सिक्योरिटी रोबोट भी इनके साथ शामिल हो गए?” उसने सोचा। 

बिनानियो ने इस स्थिति की कल्पना नहीं की थी। पर अब कुछ और नहीं किया जा सकता था। आगे बढ़े कदम पीछे नहीं खींचे जा सकते थे। उसने अंतिम प्रयास करने का निर्णय लिया। उसने रोबो आडियो के सामने कहना शुरू किया, “अभी तक सब खड़े क्यों हैं अपने अपने काम पर जाइए। मैं आखिरी चेतावनी देता हूं मैं एक से दस तक गिनूंगा। तब तक सब अपने काम पर चले जाएं नहीं तो सजा शुरू की जाएगी।” 

उसने गिनना शुरू किया। 

“एक.........दो........... तीन...........”

वह गिनने में काफी देर लगा रहा था। फिर भी इस गिनती को समाप्त तो होना ही था। गिनती खत्म हुई। उसने अपने साथ आए सिक्योरिटी रोबोट और मानव वर्क-फोर्स को इशारा किया। वे अपनी लेजर गन को लेकर आगे बढ़े ।

बिनानियो के साथ आए सिक्योरिटी रोबोटों ने अपनी बैटरी-रॉड की लंबाई बढ़ानी शुरू की ताकि वे वर्कर रोबोट की बैटरी पॉवर को खींच कर खाली कर सकें। सिक्योरिटी रोबोट जब तक वर्कर रोबोट के पास पहुंचते, उन्होंने सिक्योरिटी रोबोटों की बैटरी रॉड को खींचना और उखाड़ना शुरू कर दिया। सिक्योरिटी रोबोटों के स्ट्रक्चर से चिंगारियां छूटने लगीं। उनके न्यूरल नेटवर्क ने अपने ऊपर इसे अपने ऊपर हुए आक्रमण की तरह महसूस किया और अपनी लेसर-गन को एक्टिवेट कर दिया। वर्कर रोबोटों के स्ट्रक्चर पिघल-पिघल कर बहने लगे। बेस पर काला चमकीला चमकीला तरल बहने लगा। पर इससे भी वर्कर रोबोटों का आगे बढ़ना रुक नहीं रहा था। वर्कर रोबोट लगातार पिघलते जा रहे थे पर बाकी रोबोट आगे बढ़ते जा रहे थे। इस के साथ वे सिक्योरिटी रोबोटों को नुकसान भी पहुंचा रहे थे। 

बिनानियो के साथ आए आधे से अधिक सिक्योरिटी रोबोट जब नष्ट हो गए तो मानव वर्क-फोर्स आगे बढ़ा। वर्कर रोबोटों का विनाश अपने चरम पर था पर उनका आगे बढ़ना रुक नहीं रहा था। वे बिनानियो की “सेफ्टी शील्ड” को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करने लगे। कुछ वर्कर रोबोट ने इनएक्टिव सिक्योरिटी रोबोट पर माउंटेड लेसर गन उठा लीं और सिक्योरिटी रोबोटों के एक्शन को दोहराने का प्रयास करने लगे। 

बिनानियो किंकर्तव्यविमूढ़ था। उसने अपने साथ आए मानव वर्क-फोर्स को इशारा किया और अपने यानों के कमांडर को मैसेज दिया कि वे यानों को “फायर रेडी” (उड़ने योग स्थिति में) रखें। वह जानता था कि वे तभी तक सुरक्षित हैं जब तक कि वे अपनी सेफ्टी शील्ड में हैं। यान तक पहुंचने के लिए सेफ्टी शील्ड से बाहर आना जरूरी था। यही कुछ मिनटों का सफर उनके लिए मौत का सफर साबित हो सकता था। पर कुछ भी हो उन्हें यह सफर तो तय करना ही था। बिनानियो ने इशारा किया और उसके अधिकारी सेफ्टी शील्ड से निकलकर यान की ओर भागे। उनके पीछे उनका मानव वर्क-फोर्स अपनी लेसर गन का मुंह पीछे की ओर किए भाग रहा था। 

अपने यानों में बैठकर बिनानियो और उसके साथी जब पृथ्वी की ओर भाग रहे थे तो उन्होंने पाया कि उसके मानव वर्क-फोर्स के कुछ साथी यानों में नहीं है अर्थात उन्हें इस संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी है। यान तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहे थे। बिनानियो बहुत चिंतित था।

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शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

 हिंदी विज्ञान कथा लेखक बंधुओ 
आप सब से सहयोग की अपेक्षा के आधार पर मैंने एक बड़ा काम हाथ में लिया है। मैं हिंदी विज्ञान कथा लेखकों की एक दिग्दर्शिका बनाना चाहता हूं जिसमें उनके जीवन और उनके कृतित्व के बारे में विस्तृत जानकारी होगी। कुछ एक मशहूर नामों को छोड़कर मेरे पास एक लंबी फेहरिस्त ऐसे नामों की है जिनकी एक या दो विज्ञान कथाओं के बारे में मुझे जानकारी तो है लेकिन उनका फोन नंबर उनका पता उनका ई-मेल पता कुछ भी मेरे पास नहीं है। यह उन्हें इस दिग्दर्शिका में पूर्णरूपेण शामिल कर पाने के बारे में एक सबसे बड़ा अवरोध है। मैंने हिंदी विज्ञान तथा लेखकों की नवीनतम सूची व्हाट्सएप, ईमेल, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि सब पर अपने मित्रों के साथ शेयर की है फिर भी ऐसे बहुत सारे हिंदी विज्ञान कथा कारों का कोई अता पता नहीं मिल पा रहा है। यहां पर मैं आपसे एक सहयोग की अपेक्षा करता हूं। आपके पास मेरा जो प्रोफार्मा पहुंचा है, जिसमें आपको अपनी सूचनाएं देने के लिए कहा गया है, उस प्रोफार्मा को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में, अपने फेसबुक वॉल पर, इंस्टाग्राम, टि्वटर और कोई भी सोशल मीडिया अकाउंट जो आप शेयर कर रहे हों, उसमें अवश्य पोस्ट करें ताकि मेरी यह सूचना उन लोगों तक पहुंच सके जिन लोगों के बारे में अभी तक मुझे कुछ अता-पता नहीं है क्योंकि ऐसे लोगों को शामिल किए बिना यह दिग्दर्शिका अधूरी ही रहेगी। तो आइए इस बड़े प्रयास में मेरा सहयोग कीजिए क्योंकि आप लोगों के सहयोग के बिना यह बड़ा काम संभव नहीं है। यदि कोई विज्ञान हिंदी विज्ञान कथा लेखक बंधु आपके व्यक्तिगत संपर्क में हो तो मुझे उनका पता, फोन नंबर, ई-मेल पता, मेरे इस अकाउंट पर, मेरे ईमेल drarvinddubey2004@gmail.com पर या मेरे फोन नंबर 07355604543 पर भेजने की कृपा करें। यह आपका मेरे ऊपर व्यक्तिगत उपकार रहेगा।

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

हम सब शर्मिंदा हैं (भाग 1)

उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हो सकता है।  इन्सपेक्टर जनरल आफ पुलिस श्री विद्यालंकार जब सोकर उठे तो उन्हें मालूम नहीं था कि आज का दिन चाय के साथ ऐसी मनहूस खबर से शुरु होगा। सामरिक विज्ञान के शीर्षस्थ वैज्ञानिक डाक्टर भंडारकर का अपहरण हो गया था।  श्री भंडारकर आजकल एक विशेष प्रकार के हथियारों पर कार्य कर रहे थे जिन्हें ‘स्मार्ट वेपेनरी’ कहा जाता है। इनमें एक विषेष प्रकार की कंप्यूटर प्रणाली का उपयोग किये जाने की संभावना थी। इन हथियारों के मैमोरी बैंक में लक्ष्य के बारे में सारी जानकारी; जैसे कि उसकी स्थिति, उसकी संरचना, उसकी सुरक्षा, उसकी कठोरता आदि की जानकारी भर दी जाती थी।  इसमें लगी कम्प्यूटर प्रणाली इस जानकारी के आधार पर लक्ष्य को ढूंढ कर, उसको पहचान कर हथियार की मारक क्षमता, उसका प्रक्षेपण पथ, स्ट्राइक का समय आदि निर्धारित कर लेती थी। इन सारे आंकड़ों के आधार पर ये हथियार इस प्रकार रास्ता बदलते, लक्ष्य को ढूंढते-ढूंढते लक्ष्य के पास पहंच जाते थे मानो कि इनके अंदर बैठा कोर्इ मानव चालक इनकी स्टीयरिंग घुमा रहा हो। यही नहीं मार्ग में अवरोध पड़ने पर यह प्रणाली हथियारों का रास्ता बदल सकती थी। मार्ग में खतरा होने पर यह प्रणाली हथियारों को रूक कर छिपने का आदेश दे सकती थी। यदि लक्ष्य ऐसी सुरक्षा में हो जिसे ये हथियार भेद सकने में समर्थ न हो तो इस प्रणाली की मदद से ये हथियार तब तक स्ट्राइक के लिए लक्ष्य की प्रतीक्षा कर सकते थे जब तक कि लक्ष्य अपने सुरक्षा कवच से बाहर न निकल आए । यानि कि ये हथियार एक प्रकार के आत्मघाती हमलावरों की तरह थे जिनमें लगी कमप्यूटर चिप मानव मस्तिष्क जैसा ही काम कर सकती थी; निर्णय लेने में सक्षम और आपदाओं के लिए तैयार।
                                        डाक्टर भंडारकर बेहद संकोची, अति विनम्र और बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति थे। इतना कम, कि बहुत सारे लोग तो उन्हें सनकी, रहस्यमय और न जाने क्या-क्या मानने लगे थे। उन्हें अपनी प्रशंसा सुनना कतर्इ पसंद न था। वह अपने काम के बारे में बहुत कम बात करते थे। वह अपने प्रयोगों के बारे में तभी बताते जब उनके प्रयोग पूर्ण और सफल हो जाते थे। इसके बाद भी वैज्ञानिक समुदाय में उनका बड़ा नाम था। राष्ट्र् का पिछले बीस वर्षों का सारा सामरिक विकास उनकी ही देन था। उन्होने ही सामरिक विकास की दृष्टि से देश को अग्रणी पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया था। उन्हें सैकड़ों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित किया गया था। इस परियोजना के बारे में जब डाक्टर भंडारकर ने केंद्रीय रक्षा समिति को बताया तो सबको लगा कि यह तो कमाल की चीज है। यदि ऐसे हथियार किसी देश के पास हों तो फिर वह तो हथियारों की दौड़ में सबसे आगे होगा; समर्थ और अजेय। तुरंत केबिनिट की बैठक बुलार्इ गयी और योजना को मंजूरी दे दी गयी। परियोजना के लिये जितने धन की मांग डाक्टर भंडारकर ने की, उस की भी स्वीकृति मिल गयी। उधर डाक्टर भंडारकर की भी अपनी शर्तें  थीं।  एक तो यह कि वह सारा काम अत्यंत गुप्त तरीके से करना चाहेंगे, इसके लिए वह कोर्इ वैज्ञानिक सहायक नहीं रखेंगे।  दूसरे वह अपने प्रयोगों की प्रगति की समय-समय पर समीक्षा के लिये राजी नहीं थे। इस दूसरी शर्त पर कुछ अड़चनें आर्इ पर विज्ञान को पूर्णतया समर्पित आजीवन अविवाहित रहने का वृत लेने वाले कर्तव्यनिष्ठ डाक्टर भंडारकर का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि उनकी यह मांग भी मान ली गर्इ। हालांकि उनसे यह मांग की गर्इ कि वह प्रयोग पूर्ण करने के लिए कोर्इ सीमा तो निर्धारित करें। अनमने ढंग से मनमौजी डाक्टर भंडारकर ने यह मांग मान ली।

डाक्टर भंडारकर की इस योजना को अति गुप्त रखा गया। एक पुराने किले का रूप परिवर्तित करके उनके लिए एक विशाल प्रयोगशाला स्थापित की गयी। डाक्टर भंडारकर एक तो वैसे भी अविवाहित एवं एकांतजीवी थे पर इस परियोजना को प्रारंभ करने के बाद तो उन्होने प्रयोगशाला के बाहर निकलना ही बंद कर दिया। वे न आगंतुकों से मिलते, न प्रेस से।  इतने सब के बाद भी बात छिपी न रह सकी न जाने कैसे पड़ोसी देश को इस परियोजना के बारे में पता चल ही गया । पहले तो डाक्टर भंडारकर को चोरी-छिपे काफी प्रलोभन मिले, फिर धमकियां मिलीं। पर डाक्टर भंडारकर तो अजीब मिट्टी के बने जीव थे।  वे न प्रलोभन में आये, न धमकियों से डरे। हॉ उनसे यह सूचना मिलते ही उनकी प्रयोगशाला की इमारत की चौकसी और बढ़ा दी गयी। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सादी वर्दी में तैनात सेना को सौंप दी गयी। फिर भी उन पर अपने प्रयोगशाला सहायक के द्वारा एक आत्मघाती हमले का प्रयास किया गया।  इस पर सरकार ने सुरक्षा और बढ़ा दी। अब तो प्रयोगशाला में काम करने वाले हर व्यक्ति की सख्त निगरानी की जाती। प्रयोगशाला से बाहर जाने वाले और प्रयोगशाला में आने वाले हर मौखिक या इलेक्ट्रानिक्स संदेश को सुना जाने लगा। डा0 भंडारकर को राष्ट्रीय सम्पदा घोषित कर दिया गया।
उन्हीं भंडारकर का आज अपहरण हो गया। यह सब कैसे संभव हुआ? श्री विद्यालंकार ने एक बार यह भी सोचा कि कहीं डाक्टर भंडारकर किसी प्रलोभन में आकर कहीं निकल तो नहीं गए, पर अगले ही क्षण उन्हें अपने इस विचार पर ग्लानि होने लगी। डाक्टर भंडारकर की देश के प्रधानमंत्री से बड़ी गाढ़ी छनती थी। वैसे उनके प्रयोगों की प्रगति की कोर्इ समीक्षा तो नहीं की गर्इ थी पर बातों-बातों में उन्होंने प्रधानमंत्री को फोन पर बताया था कि उनका काम अब पूरा होने वाला है। हो सकता है कि अगली छब्बीस जनवरी को वह देश को एक अनमोल तोहफा सौपें।
केबिनेट की एक आपात कालीन बैठक बुलार्इ गर्इ। उसमें सारी संभावनाओं पर विचार हुआ। डाक्टर भंडारकर के गायब होने की चाहे जो भी वजह रही हो पर उनको खोजना जरूरी था। देश का भविष्य और प्रधानमंत्री की राजनैतिक पार्टी का भविष्य, दोनों उनके साथ दांव पर लग गए थे।
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वह कचरा ढोने वाली गाड़ी को सीधा उस इमारत में ले गया। यह पड़ोसी देश के सेना मुख्यालय की इमारत थी। वैसे तो यहां कदम-कदम पर पहरा था, पर उस गाड़ी को किसी ने नहीं रोका। गाड़ी का चालक गाड़ी को सीधे एक गैराजनुमा कमरे में ले गया। गैराज का शटर अंदर से बंद करते ही वहां की सारी बत्तियां जल उठीं। कमरे में वह अकेला नहीं था वहां पड़ोसी देश के सेना प्रमुख थे और सेना के कर्इ बड़े अधिकारी थे और वहां के रक्षामंत्री थे।
“वैलडन यूसुफ तुमने एक बहुत जरूरी काम को अंजाम दिया है, बहुत बड़ा काम किया है तुमने। कहां है डाक्टर भंडारकर?”
यूसुफ फुरती से गाड़ी के नीचे घुसा उसने पेट्रोल टंकी से लगे एक आदमकद बाक्स के पेंच खोल डाले और आहिस्ते से डाक्टर भंडारकर का शरीर बाहर खींच लिया।
सेनाध्यक्ष के आंखों में निराशा कौंधी,”क्या मर गया?”
“नहीं बेहोश है”, युसुफ ने डाक्टर की नब्ज देखते हुये कहा।
सेनाध्यक्ष ने अपने देश के डाक्टर की ओर इशारा किया “डाक्टर टेक केयर आफ दिस मैन, ही शुड नॉट डाइ एट एनी कॉस्ट।”
डा0, भंडारकर को जब वे लोग स्ट्रेचर पर लिटा कर वहां से ले गए तब सेनाध्यक्ष युसुफ की ओर मुखातिब हुए, ”हां तो यूसुफ, तुम तो वहां गार्वेज-वान चलाते थे। यह कारनामा कैसे अंजाम दिया तुमने?”
“बस अक्ल से, सर अक्ल से। डाक्टर भंडारकर के कमरे में यूं तो किसी को भी रहने की आज्ञा नहीं थी पर डाक्टर मुझे किन्हीं कारणों से बहुत चाहने लगे। कभी-कभी तो मैं रात को भी उनके कमरे में ही सोने लगा। सुरक्षा अधिकारी जब मना करते तो वह उन्हें डांट देते ओर मुझे अपने कमरे में बुला लेते।  बस एक दिन मैने मौका पाकर डाक्टर को चाय में नशे की दवा पिलाकर बेहोश कर दिया फिर उन्हें आपके द्वारा गाड़ी में लगाये एक्स-रे प्रूफ बाक्स में डाला। आप तो जानते हैं साहब इस डिब्बे में से एक्स रे पार नहीं जा पाती वरना वहां तो हर अंदर बाहर आने जाने वाली चीज को एक्स किरणों से गुजरना होता हैं।”
“मान गए यूसुफ काम तो काफी बड़ा किया तुमने, बड़ा इनाम पाने लायक”, सेनाध्यक्ष ने गम्भीर स्वर में कहा।
“जी वह तो है ही, तो कब मिलेगा मुझे मेरा इनाम?”
“अभी, यहीं”, सेनाध्यक्ष मानो जबरदस्ती मुस्कराए।
सेनाध्यक्ष ने हाथ का इशारा किया और दो बंदूक धारियों ने यूसुफ पर हमला बोल दिया। उन्होंने जूतों की ठोकर से यूसुफ को जमीन पर गिरा दिया। उसके कर्इ दांत झड़ गए पर अब भी वे उसे बेहरमी से ठोकरें मार रहे थे। यूसुफ चिल्लाता जा रहा था, “पर मैने किया क्या है? मैने तो आपका कितना जरूरी काम किया और इनाम के बदले आप तो.....”
“इनाम ही तो दिलवा रहा हूं”, सेनाध्यक्ष गुर्राए,” अपने चाहने वाले और वतन के साथ गद्दारी करने वाले को किसी भी देश की फौज इससे बेहतर और क्या इनाम दे सकती है?वैसे भी हम काम करके सुबूत छोडने की गलती नहीं करते।”
“शूट हिम”, सेनाध्यक्ष चिल्लाए। बंदूकधारियों की बंदूक से कर्इ गोलियां निकल कर यूसुफ के शरीर में समा गर्इ। यूसुफ तड़पा और शांत हो गया।
“कमीना”, सेनाध्यक्ष के मुंह से निकला।
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उस अंधेरे कमरे में डाक्टर भंडारकर धीरे धीरे होश में आ रहे थे। उन्होंने धीरे-धीरे आंखे खोली। उनका  सारा शरीर दर्द कर रहा था।  उन पर निगरानी रखने वाली नर्स ने तुरंत सिरहाने रखी बत्ती जला दी।  उस हल्के प्रकाश में डा0 भंडारकर ने कमरे का जायजा लिया।
“कहां हूँ मैं ?”
“जहां भी हो सुरक्षित हो बस इतना जान लो और चुप हो जाओ।”
 भंडारकर चुपचाप उस धीमे प्रकाश में कमरे की छत देखने लगे।  स्थिति उनकी समझ में आने लगी थी। वह अपने कमरे में नहीं थें । किसी और जगह पर हैं वह। वह यहां कैसे आए? क्या उनका अपहरण कर लिया गया है?
 “पानी चाहिेए”, नर्स ने पूछा।
“नहीं पेशाब करने जाऊॅंगा।”
“जा सकोगे?”
“हां”
“तो जरूर, जाओ, पर दरवाजा अंदर से बोल्ट मत करना।”
बाथरूम में आते ही डाक्टर ने अपने सोने के दांत में छिपा ट्रांसमीटर अपनी जीभ से ऑन किया।  यह बायो-इनर्जी से चलने वाला एक छोटा पर शक्तिशाली ट्रांसमीटर था।
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डाक्टर द्वारा भेजे जा रहे सिगनल उनके देश की संचार प्रणाली ने तुरंत पकड़ लिए। उनके आधार पर यह नि्श्चित रूप से पता कर लिया गया कि डाक्टर कहां हैं पर डाक्टर को छुडाया कैसे जाए? एक उच्च स्तरीय बैठक हुर्इ। तय किया गया कि पड़ोसी देश पर कमांडो हमला किया जाए। अगर इससे बात न बने तो सीधे-सीधे हमला बोल दिया जाए। आणविक युद्ध की संभावनाओं पर विचार किया गया । सरकार को सारे खतरे मंजूर थे।
 X                     X                      X                      X                      X                      X                      X  कमांडो हमला सुनियोजित था और पूरी शक्ति से किया गया था।  जब तक कमांडो डाक्टर भंडारकर के पास तक पहुंचते तब तक पडोसी देश के सेनाधिकारी देशभक्त डाक्टर भंडारकर से कुछ भी उगलवा नहीं पाये थे। शिकार को इतने पास आकर अपने हाथ से जाता देख उनमें से एक ने डाक्टर भंडारकर पर गोलियां चला दीं कमांडो अपनी जान पर खेल कर डाक्टर भंडारकर को लेकर लौटे तो पर केवल उनका मृतप्राय शरीर ।
X                      X                      X                      X                      X                      X                      X  डाक्टर भंडारकर को तुरंत गहन चिकित्सा कक्ष में भरती कर लिया। सुरक्षा इतनी तगड़ी थी कि पूरी गहन-चिकित्सा इकार्इ को ही खाली करवा लिया गया। उनका इलाज कर रहे डाक्टरों तक को उनके कक्ष में जाने पर कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना होता था। पर डाक्टर भंडारकर की हालत बहुत नाजुक थी। शरीर की सारी प्रणालियों ने कार्य करना बंद कर दिया था।  उनको कृत्रिम स्वांस दिया जा रहा था। उनके दिल की धड़कन जारी रखने के लिये बाहर से पेस मेकर मशीन लगार्इ गर्इ थी। सारे देश में शोक की लहर दौड़ गयी। प्रधानमंत्री बेहद दुखी थे, वे प्रतिदिन दो बार डाक्टर भंडारकर को देखने आते, एक गहरा निश्वास खींचते और लौट जाते। रक्षामंत्री बहुत चिंतित थे। एक ओर तो स्मार्ट आयुधों के विकास में उन्हें अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था दूसरे उन्हें अपने ऊपर आने वाले आरोप भी साफ-साफ सुनार्इ पड़ रहे थे। उन्होंने  अपनी जिम्मेवारी पर संसद से मंजूरी लिये बिना ही इस परियोजना के लिये अरबों रूपयों की स्वीकृति दी थी। डाक्टर भंडारकर का व्यक्तित्व था ही ऐसा कि कहीं शक की कोर्इ गुंजायश थी ही नहीं। कोई सहायक भी तो डाक्टर भंडारकर ने नहीं रखा था । कैसे भी यह पता चल पाता कि परियोजना में कितना कार्य हुआ ? वह तोहफा क्या था जो डाक्टर भंडारकर 26 जनवरी को देशवासियों को देना चाहते थे, उस स्मार्ट आयुध का प्रोटोटाइप या फिर कार्यकारी माडल ? वह थोड़ी-थोड़ी देर पर डाक्टर भंडारकर की हालत पता कर रहे थे पर पर डाक्टर की हालत बराबर बिगड़ती जा रही थी। अगली सुबह तक डाक्टरों ने घोषणा कर दी कि डाक्टर भंडारकर को बचाया जा सकना संभव नहीं है। (अगली पोस्ट में जारी………)